श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.262.9-10h 
विधिवत् पूजयामास स्वयं किङ्करवत् स्थित:॥ ९॥
अहानि कतिचित् तत्र तस्थौ स मुनिसत्तम:।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन स्वयं सेवक की तरह उनकी सेवा में खड़ा रहा और विधिपूर्वक उनकी पूजा की। महर्षि दुर्वासा कई दिनों तक वहाँ रहे।
 
Duryodhana himself stood in his service like a servant and worshipped him according to the rituals. The great sage Durvasa stayed there for several days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)