श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.262.25 
करेण च करं गृह्य कर्णस्य मुदितो भृशम्।
कर्णोऽपि भ्रातृसहितमित्युवाच नृपं मुदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण का हाथ अपने हाथ में लेकर वे बहुत प्रसन्न हुए। कर्ण ने भी अपने भाइयों सहित राजा दुर्योधन से बड़ी प्रसन्नता से यह बात कही।
 
He was very happy to take Karna's hand in his hand. Karna too said this to King Duryodhan along with his brothers with great joy. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)