श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.262.23-24 
तथा करिष्ये त्वत्प्रीत्येत्येवमुक्त्वा सुयोधनम्॥ २३॥
दुर्वासा अपि विप्रेन्द्रो यथागतमगात् तत:।
कृतार्थमपि चात्मानं तदा मेने सुयोधन:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन से यह कहकर कि, ‘मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, इसलिए मैं भी वैसा ही करूँगा।’ महाब्राह्मण दुर्वासा जिस मार्ग से आए थे, उसी मार्ग से चले गए। उस समय दुर्योधन ने अपने को कृतार्थ समझा।
 
Having said this to Duryodhan, 'Because I love you, I will do the same', the great Brahmin Durvasa left the same way he had come. At that time, Duryodhan considered himself fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)