Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.262.14-15: भरत! ऐसा उन्होंने अनेक बार किया, किन्तु जब राजा दुर्योधन व्याकुल या क्रोधित नहीं हुए, तब दुर्धर्ष ऋषि अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले, 'मैं तुम्हें वर देना चाहता हूँ।' | mahabharat अध्याय 3.262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वर्तमाने तथा तस्मिन् यदा दुर्योधनो नृप:॥ १४॥
विकृतिं नैति न क्रोधं तदा तुष्टोऽभवन्मुनि:।
आह चैनं दुराधर्षो वरदोऽस्मीति भारत॥ १५॥
अनुवाद
भरत! ऐसा उन्होंने अनेक बार किया, किन्तु जब राजा दुर्योधन व्याकुल या क्रोधित नहीं हुए, तब दुर्धर्ष ऋषि अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले, 'मैं तुम्हें वर देना चाहता हूँ।'
Bhaarat! He did this many times, but when King Duryodhan did not get agitated or angry, the sage Durdharsh became very pleased and said, 'I want to grant you a boon.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥