Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.262.11-12: कभी-कभी ऋषि कहते, "हे राजन! मुझे बहुत भूख लगी है, मुझे जल्दी से भोजन कराओ।" ऐसा कहकर वे स्नान करने चले जाते और बहुत देर बाद लौटते। लौटकर वे कहते, "मैं भोजन नहीं करूँगा; आज मुझे भूख नहीं है।" ऐसा कहकर वे अंतर्ध्यान हो जाते। | mahabharat अध्याय 3.262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्षुधितोऽस्मि ददस्वान्नं शीघ्रं मम नराधिप॥ ११॥
इत्युक्त्वा गच्छति स्नातुं प्रत्यागच्छति वै चिरात्।
न भोक्ष्याम्यद्य मे नास्ति क्षुधेत्युक्त्वैत्यदर्शनम्॥ १२॥
अनुवाद
कभी-कभी ऋषि कहते, "हे राजन! मुझे बहुत भूख लगी है, मुझे जल्दी से भोजन कराओ।" ऐसा कहकर वे स्नान करने चले जाते और बहुत देर बाद लौटते। लौटकर वे कहते, "मैं भोजन नहीं करूँगा; आज मुझे भूख नहीं है।" ऐसा कहकर वे अंतर्ध्यान हो जाते।
Sometimes the sage would say, "O King! I am very hungry, give me food quickly." Saying this, he would go to take a bath and return after a long time. On returning, he would say, "I will not eat; I am not hungry today." Saying this, he would disappear. 11-12.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥