Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.262.10-11h: महाराज जनमेजय! राजा दुर्योधन ने राजा के शाप के भय से अपना सारा आलस्य त्याग दिया और दिन-रात उनकी सेवा में लगा रहा (आदर से नहीं, बल्कि) राजा के शाप के भय से। | mahabharat अध्याय 3.262: दुर्योधनका महर्षि दुर्वासाको आतिथ्यसत्कारसे संतुष्ट करके उन्हें युधिष्ठिरके पास भेजकर प्रसन्न होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं च पर्यचरद् राजा दिवारात्रमतन्द्रित:॥ १०॥
दुर्योधनो महाराज शापात् तस्य विशङ्कित:।
अनुवाद
महाराज जनमेजय! राजा दुर्योधन ने राजा के शाप के भय से अपना सारा आलस्य त्याग दिया और दिन-रात उनकी सेवा में लगा रहा (आदर से नहीं, बल्कि) राजा के शाप के भय से।
Maharaja Janamejaya! King Duryodhana, fearing the curse of the king, left all his laziness and continued to serve him day and night (not out of respect, but) out of the fear of the curse of the king.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥