Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.8-9: स्वर्ग में तैंतीस हज़ार योजन का एक बहुत ऊँचा सुवर्णमय पर्वत है, जो मेरुगिरि नाम से प्रसिद्ध है। मुद्गल! वहाँ देवताओं के नंदन के समान पवित्र उद्यान और पुण्यात्मा पुरुषों का विश्रामस्थान है। वहाँ किसी को भूख-प्यास नहीं लगती, मन में कभी ग्लानि नहीं होती, सर्दी-गर्मी की पीड़ा नहीं होती और किसी प्रकार का भय भी नहीं होता। 8-9। | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्ग में तैंतीस हज़ार योजन का एक बहुत ऊँचा सुवर्णमय पर्वत है, जो मेरुगिरि नाम से प्रसिद्ध है। मुद्गल! वहाँ देवताओं के नंदन के समान पवित्र उद्यान और पुण्यात्मा पुरुषों का विश्रामस्थान है। वहाँ किसी को भूख-प्यास नहीं लगती, मन में कभी ग्लानि नहीं होती, सर्दी-गर्मी की पीड़ा नहीं होती और किसी प्रकार का भय भी नहीं होता। 8-9।
In heaven, there is a very high golden mountain of thirty-three thousand yojanas which is famous by the name of Merugiri. Mudgal! There are sacred gardens like Nandan of the Gods and the recreation place of virtuous men. There, nobody feels hungry or thirsty, there is never any remorse in the mind, there is no pain of heat or cold and there is no fear at all. 8-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥