Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.261.41: व्यासजी कहते हैं - राजन ! देवदूत की यह बात सुनकर महर्षि मुद्गल ने बुद्धिपूर्वक विचार किया और विचार करके देवदूत से कहा -॥41॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.261.41 
व्यास उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु मौद्‍गल्यो वाक्यं विममृशे धिया।
विमृश्य च मुनिश्रेष्ठो देवदूतमुवाच ह॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - राजन ! देवदूत की यह बात सुनकर महर्षि मुद्गल ने बुद्धिपूर्वक विचार किया और विचार करके देवदूत से कहा -॥41॥
 
Vyasa says - King! After listening to this statement of the angel, the great sage Mudgal thought over it wisely. After thinking, he said to the angel -॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)