Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.39: जो लोग आसक्ति और अहंकार से रहित हैं, जो सुख-दुःख के द्वन्द्वों से ऊपर उठ गए हैं, जो इन्द्रियों को वश में करने में समर्थ हैं और जो ध्यान में लगे हुए हैं, वे ही उस लोक में जा सकते हैं ॥39॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग आसक्ति और अहंकार से रहित हैं, जो सुख-दुःख के द्वन्द्वों से ऊपर उठ गए हैं, जो इन्द्रियों को वश में करने में समर्थ हैं और जो ध्यान में लगे हुए हैं, वे ही उस लोक में जा सकते हैं ॥39॥
Only those people who are free from attachment and ego, who have risen above the dualities of happiness and sorrow, who are capable of achieving the senses and who are engaged in meditation, can go to that world. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥