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mahabharat 3.261.38: हे ब्राह्मण! जिनका मन सांसारिक भोगों में लगा हुआ है, वे वहाँ नहीं जा सकते। जो लोग अहंकार, लोभ, क्रोध, मोह और कपट से भरे हुए हैं, वे वहाँ नहीं पहुँच सकते।   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.261.38 
न तत्र विप्र गच्छन्ति पुरुषा विषयात्मका:।
दम्भलोभमहाक्रोधमोहद्रोहैरभिद्रुता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! जिनका मन सांसारिक भोगों में लगा हुआ है, वे वहाँ नहीं जा सकते। जो लोग अहंकार, लोभ, क्रोध, मोह और कपट से भरे हुए हैं, वे वहाँ नहीं पहुँच सकते।
 
O Brahmin! Those whose mind is engrossed in worldly pleasures cannot go there. People who are filled with arrogance, greed, anger, delusion and treachery cannot reach there. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)