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mahabharat 3.261.31: स्वर्ग से गिरते समय वासी अपनी चेतना खो देते हैं। रजोगुण के आक्रमण से उनकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। पहले उनके गले की मालाएँ सूख जाती हैं; इस कारण जब उन्हें अपने गिरने का समाचार मिलता है, तो उनके मन में महान भय उत्पन्न हो जाता है॥31॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.261.31 
संज्ञामोहश्च पततां रजसा च प्रधर्षणम्।
प्रम्लानेषु च माल्येषु तत: पिपतिषोर्भयम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग से गिरते समय वासी अपनी चेतना खो देते हैं। रजोगुण के आक्रमण से उनकी बुद्धि नष्ट हो जाती है। पहले उनके गले की मालाएँ सूख जाती हैं; इस कारण जब उन्हें अपने गिरने का समाचार मिलता है, तो उनके मन में महान भय उत्पन्न हो जाता है॥31॥
 
While falling from heaven, the residents lose their consciousness. Their intelligence is spoilt due to the attack of Rajoguna. First, the garlands around their necks wither; due to this, when they get the news of their fall, a great fear enters their minds.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)