Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.28: स्वर्ग में तुम्हारे पुण्य कर्मों का फल मिलता है। वहाँ कोई नया कर्म नहीं किया जाता। वहाँ के सुख केवल अपने पुण्यों की पूंजी गँवाकर ही प्राप्त किए जा सकते हैं। 28. | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वर्ग में तुम्हारे पुण्य कर्मों का फल मिलता है। वहाँ कोई नया कर्म नहीं किया जाता। वहाँ के सुख केवल अपने पुण्यों की पूंजी गँवाकर ही प्राप्त किए जा सकते हैं। 28.
The fruits of your good deeds are enjoyed in heaven. No new deeds are done there. The pleasures there can be obtained only by losing the capital of your good deeds. 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥