Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.27: हे ब्राह्मण! यह स्वर्ग का सुख है और इसी प्रकार वहाँ नाना प्रकार के लोक हैं। अब तक मैंने तुमसे स्वर्ग के गुण कहे हैं; अब उसके दोष भी मुझसे सुनो॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मण! यह स्वर्ग का सुख है और इसी प्रकार वहाँ नाना प्रकार के लोक हैं। अब तक मैंने तुमसे स्वर्ग के गुण कहे हैं; अब उसके दोष भी मुझसे सुनो॥ 27॥
O Brahmin! This is the happiness of heaven and similarly there are different types of worlds there. Till now I have told you the qualities of heaven; now listen to its defects also from me.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥