Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.26: हे ब्रह्मन्! तुमने अपने दान के प्रभाव से अनायास ही वह स्वर्गीय सुख और ऐश्वर्य प्राप्त कर लिया है। अब तुम अपनी तपस्या के तेज से तेजस्वी होकर अपने पुण्यों से प्राप्त दिव्य यश का भोग करो। 26॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्रह्मन्! तुमने अपने दान के प्रभाव से अनायास ही वह स्वर्गीय सुख और ऐश्वर्य प्राप्त कर लिया है। अब तुम अपनी तपस्या के तेज से तेजस्वी होकर अपने पुण्यों से प्राप्त दिव्य यश का भोग करो। 26॥
Brahman! You have attained that heavenly happiness and wealth without any effort due to the effect of your donation. Now, resplendent with the brilliance of your penance, enjoy the divine glory that you have attained through your virtues. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥