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mahabharat 3.261.25: बुद्धिमान् पुरुष उत्तम नियमों का पालन करके अथवा विधिपूर्वक दान देकर इन तैंतीस देवताओं के लोकों को प्राप्त करते हैं ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.261.25 
त्रयस्त्रिंशदिमे देवा येषां लोका मनीषिभि:।
गम्यन्ते नियमै: श्रेष्ठैर्दानैर्वा विधिपूर्वकै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान् पुरुष उत्तम नियमों का पालन करके अथवा विधिपूर्वक दान देकर इन तैंतीस देवताओं के लोकों को प्राप्त करते हैं ॥25॥
 
Wise men attain the worlds of these thirty-three gods by following good rules or by giving donations in a prescribed manner. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)