Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.24: मौद्गल्य! स्वर्ग में रहने वाले देवता भी उस परमपद (ऋभु नामक देवताओं के) को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। वह परासिद्धि की अवस्था है, जो अत्यंत दुर्लभ है। विषय-भोगों की इच्छा रखने वाले मनुष्य वहाँ नहीं पहुँच सकते। 24। | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मौद्गल्य! स्वर्ग में रहने वाले देवता भी उस परमपद (ऋभु नामक देवताओं के) को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। वह परासिद्धि की अवस्था है, जो अत्यंत दुर्लभ है। विषय-भोगों की इच्छा रखने वाले मनुष्य वहाँ नहीं पहुँच सकते। 24।
Maudgalya! Even the gods residing in heaven desire to attain that ultimate state (of the gods called Ribhu). That is the state of Para Siddhi, which is extremely rare. People who desire sensual pleasures cannot reach there. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥