Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.22: वे सुख में स्थित रहते हैं, किन्तु सुख की इच्छा नहीं करते। वे देवों के भी देव हैं और सनातन हैं। कालचक्र के अंत में भी उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता - वे ज्यों के त्यों बने रहते हैं ॥22॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न सुखे सुखकामास्ते देवदेवा: सनातना:।
न कल्पपरिवर्तेषु परिवर्तन्ति ते तथा॥ २२॥
अनुवाद
वे सुख में स्थित रहते हैं, किन्तु सुख की इच्छा नहीं करते। वे देवों के भी देव हैं और सनातन हैं। कालचक्र के अंत में भी उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता - वे ज्यों के त्यों बने रहते हैं ॥22॥
They are established in happiness, but do not desire happiness. They are the gods of gods and are eternal. Even at the end of the cycle of time, there is no change in their state – they remain as they are. ॥22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥