Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.21: वे देवताओं की तरह यज्ञों से जीविका नहीं चलाते। उन्हें अमृत पीने की आवश्यकता नहीं होती। उनके शरीर दिव्य ज्योति से युक्त हैं। उनका कोई विशेष रूप नहीं है॥21॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वर्तयन्त्याहुतिभिस्ते नाप्यमृतभोजना:।
तथा दिव्यशरीरास्ते न च विग्रहमूर्तय:॥ २१॥
अनुवाद
वे देवताओं की तरह यज्ञों से जीविका नहीं चलाते। उन्हें अमृत पीने की आवश्यकता नहीं होती। उनके शरीर दिव्य ज्योति से युक्त हैं। उनका कोई विशेष रूप नहीं है॥21॥
They do not make a living from sacrifices like the gods. They do not need to drink nectar. Their bodies are divinely luminous. They do not have any special form.॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥