Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.261.20: उनका उत्तम लोक स्वयं प्रकाशमान, तेजस्वी और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। वे स्त्रियों के प्रति कभी द्वेष नहीं करते। उनके हृदय में प्रजा के ऐश्वर्य के प्रति कभी ईर्ष्या नहीं होती। 20॥ | mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वयंप्रभास्ते भास्वन्तो लोका: कामदुघा: परे।
न तेषां स्त्रीकृतस्तापो न लोकैश्वर्यमत्सर:॥ २०॥
अनुवाद
उनका उत्तम लोक स्वयं प्रकाशमान, तेजस्वी और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। वे स्त्रियों के प्रति कभी द्वेष नहीं करते। उनके हृदय में प्रजा के ऐश्वर्य के प्रति कभी ईर्ष्या नहीं होती। 20॥
Their best world is self-luminous, radiant and fulfills all desires. They do not feel sorry for women. They never have jealousy in their hearts for the opulence of the people. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥