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mahabharat 3.261.17: हे मुनि! देवताओं के उपर्युक्त लोकों के ऊपर भी अनेक गुणों से युक्त अन्य दिव्य लोक हैं ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.261.17 
तेषां तथाविधानां तु लोकानां मुनिपुङ्गव।
उपर्युपरि लोकस्य लोका दिव्या गुणान्विता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे मुनि! देवताओं के उपर्युक्त लोकों के ऊपर भी अनेक गुणों से युक्त अन्य दिव्य लोक हैं ॥17॥
 
Great sage! Above the aforementioned worlds of the gods, there are many other divine worlds endowed with various qualities. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)