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mahabharat 3.261.14: जिनके शरीर में कभी पसीना नहीं आता, दुर्गन्ध नहीं आती और मल-मूत्र का उत्सर्जन नहीं होता। हे ॐ! उनके वस्त्र कभी मैले नहीं होते। ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.261.14 
न संस्वेदो न दौर्गन्ध्यं पुरीषं मूत्रमेव च।
तेषां न च रजो वस्त्रं बाधते तत्र वै मुने॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जिनके शरीर में कभी पसीना नहीं आता, दुर्गन्ध नहीं आती और मल-मूत्र का उत्सर्जन नहीं होता। हे ॐ! उनके वस्त्र कभी मैले नहीं होते। ॥14॥
 
Those bodies never sweat, do not smell bad and there is no excretion of urine and feces. O sage, their clothes never get dirty. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)