Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.261.13: मुद्गल! स्वर्गवासियों के शरीरों में तैजस तत्त्व की प्रधानता होती है। वे शरीर केवल पुण्य कर्मों से ही प्राप्त होते हैं। वे माता-पिता के वीर्य से उत्पन्न नहीं होते। 13॥   |   mahabharat अध्याय 3.261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 261: देवदूतद्वारा स्वर्गलोकके गुण-दोषोंका तथा दोषरहित विष्णुधामका वर्णन सुनकर मुद्‍गलका देवदूतको लौटा देना एवं व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अपने आश्रमको लौट जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.261.13 
तैजसानि शरीराणि भवन्त्यत्रोपपद्यताम्।
कर्मजान्येव मौद्‍गल्य न मातृपितृजान्युत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मुद्गल! स्वर्गवासियों के शरीरों में तैजस तत्त्व की प्रधानता होती है। वे शरीर केवल पुण्य कर्मों से ही प्राप्त होते हैं। वे माता-पिता के वीर्य से उत्पन्न नहीं होते। 13॥
 
Mudgal! Taijas element predominates in the bodies of the heavenly inhabitants. Those bodies are attained only through virtuous deeds. They do not originate from the semen of their parents. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)