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mahabharat 3.260.7: महाराज! प्रत्येक उत्सव पर तीनों लोकों के स्वामी इन्द्र देवताओं सहित साक्षात् आकर उनके यज्ञ में भाग लेते थे॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.260.7 
तस्येन्द्र: सहितो देवै: साक्षात् त्रिभुवनेश्वर:।
प्रत्यगृह्णान्महाराज भागं पर्वणि पर्वणि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! प्रत्येक उत्सव पर तीनों लोकों के स्वामी इन्द्र देवताओं सहित साक्षात् आकर उनके यज्ञ में भाग लेते थे॥7॥
 
Maharaj! On every festival, Indra, the lord of the three worlds, used to come in person along with the gods and take part in his yagya. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)