यदत्र तथ्यं पथ्यं च तद् ब्रवीह्यविचारयन्।
श्रुत्वा तथा करिष्यामि व्यवसायं गिरा तव॥ ३६॥
अनुवाद
इसके उत्तर में जो कुछ सत्य और हितकर हो, उसे बिना किसी संकोच के मुझसे कहिए। आपकी बात सुनकर मैं उसके आधार पर अपना कर्तव्य निश्चित करूँगा।॥36॥
In reply to this, tell me whatever is true and beneficial without any hesitation. After listening to you, I will decide my duty on the basis of that.'॥ 36॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि व्रीहिद्रौणिकपर्वणि मुद्गलोपाख्याने षष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत व्रीहिद्रौणिकपर्वमें मुद्गलोपाख्यानसम्बन्धी दो सौ साठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६०॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)