श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.260.35 
सतां साप्तपदं मैत्रमाहु: सन्त: कुलोचिता:।
मित्रतां च पुरस्कृत्य पृच्छामि त्वामहं विभो॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! सात कदम साथ-साथ चलने से सज्जनों में मित्रता स्थापित होती है, ऐसा सज्जनों का कथन है। उसी मैत्री को ध्यान में रखकर मैं आपसे उपर्युक्त प्रश्न पूछ रहा हूँ ॥35॥
 
‘Prabhu! Friendship is established between noble men by walking seven steps together, this is the saying of noble men. Keeping that friendship in mind, I am asking you the above question. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)