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mahabharat 3.260.33-34: देवदूत के ऐसा कहने पर महर्षि मुद्गल ने उससे कहा - 'देवदूत! मैं तुमसे स्वर्ग में रहने वाले लोगों के गुण सुनना चाहता हूँ। वहाँ रहने वाले लोगों में क्या गुण होते हैं? वे किस प्रकार की तपस्या करते हैं? और उनका स्थिर विचार क्या है? स्वर्ग में क्या सुख है और वहाँ क्या दोष हैं?'   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  3.260.33-34 
तमेवंवादिनमृषिर्देवदूतमुवाच ह।
इच्छामि भवता प्रोक्तान् गुणान् स्वर्गनिवासिनाम्॥ ३३॥
के गुणास्तत्र वसतां किं तप: कश्च निश्चय:।
स्वर्गे तत्र सुखं किं च दोषो वा देवदूतक॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
देवदूत के ऐसा कहने पर महर्षि मुद्गल ने उससे कहा - 'देवदूत! मैं तुमसे स्वर्ग में रहने वाले लोगों के गुण सुनना चाहता हूँ। वहाँ रहने वाले लोगों में क्या गुण होते हैं? वे किस प्रकार की तपस्या करते हैं? और उनका स्थिर विचार क्या है? स्वर्ग में क्या सुख है और वहाँ क्या दोष हैं?'
 
When the angel said this, Maharishi Mudgal said to him - 'Angel! I want to hear from you the qualities of the people living in heaven. What qualities do the people living there have? What kind of penance do they do? And what is their fixed thought? What happiness is there in heaven and what are the defects there?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)