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mahabharat 3.260.32: देवदूत ने ब्रह्मर्षि मुद्गल से कहा - 'मुनि! यह विमान आपको अपने पुण्य कर्मों के कारण मिला है। इस पर बैठिए। आपने परम सिद्धि प्राप्त कर ली है।'॥32॥   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.260.32 
उवाच चैनं विप्रर्षिं विमानं कर्मभिर्जितम्।
समुपारोह संसिद्धिं प्राप्तोऽसि परमां मुने॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
देवदूत ने ब्रह्मर्षि मुद्गल से कहा - 'मुनि! यह विमान आपको अपने पुण्य कर्मों के कारण मिला है। इस पर बैठिए। आपने परम सिद्धि प्राप्त कर ली है।'॥32॥
 
The angel said to Brahmarshi Mudgal - 'Muni! You have got this plane due to your good deeds. Sit on it. You have attained the ultimate success.'॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)