Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.260.27-28: हम आपसे मिलकर अत्यंत प्रसन्न हैं और आपको अपना उपकार मानते हैं। संयम, धैर्य, दान, आत्मसंयम, दया, सत्य और धर्म ये सभी गुण आपमें पूर्ण रूप से विद्यमान हैं। आपके समान शुद्ध हृदय वाला दूसरा कोई नहीं है। आपने अपने पुण्यकर्मों से समस्त लोकों को जीत लिया है; आप परमपद को प्राप्त हो चुके हैं॥ 27-28॥ | mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हम आपसे मिलकर अत्यंत प्रसन्न हैं और आपको अपना उपकार मानते हैं। संयम, धैर्य, दान, आत्मसंयम, दया, सत्य और धर्म ये सभी गुण आपमें पूर्ण रूप से विद्यमान हैं। आपके समान शुद्ध हृदय वाला दूसरा कोई नहीं है। आपने अपने पुण्यकर्मों से समस्त लोकों को जीत लिया है; आप परमपद को प्राप्त हो चुके हैं॥ 27-28॥
‘We are very happy to meet you and we consider you to be a favour to us. All these qualities – self-control, patience, charity, self-control, mercy, truth and religion – are present in you in full. There is no one else who has a pure heart like you. You have conquered all the worlds with your good deeds; you have attained the supreme state.॥ 27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥