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mahabharat 3.260.26: 'परिश्रम से अर्जित धन को शुद्ध हृदय से दान करना बड़ा कठिन है। परन्तु हे महात्मन! आपने यह सब प्रत्यक्ष करके दिखा दिया है।॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.260.26 
श्रमेणोपार्जितं त्यक्तुं दु:खं शुद्धेन चेतसा।
तत् सर्वं भवता साधो यथावदुपपादितम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'परिश्रम से अर्जित धन को शुद्ध हृदय से दान करना बड़ा कठिन है। परन्तु हे महात्मन! आपने यह सब प्रत्यक्ष करके दिखा दिया है।॥ 26॥
 
‘It is very difficult to donate the wealth earned through hard work with a pure heart. But, great man! You have proved all this in reality.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)