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mahabharat 3.260.20: अपनी पत्नी और पुत्र के साथ अन्न बीनते समय विप्रवर मुद्गल के हृदय में क्रोध, द्वेष, भय और अपमान का भाव प्रवेश नहीं कर सका ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.260.20 
न क्रोधो न च मात्सर्यं नावमानो न सम्भ्रम:।
सपुत्रदारमुञ्छन्तमाविवेश द्विजोत्तमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अपनी पत्नी और पुत्र के साथ अन्न बीनते समय विप्रवर मुद्गल के हृदय में क्रोध, द्वेष, भय और अपमान का भाव प्रवेश नहीं कर सका ॥20॥
 
While picking grains along with his wife and son, anger, hatred, panic and insult could not enter the heart of Vipravar Mudgal. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)