Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.260.14-16: मुद्गल ने उनसे कहा, "महर्षि! आपका स्वागत है।" ऐसा कहकर उन्होंने उन्हें पाद्य (जल), उत्तम अर्घ्य (जल) और आचमनीय (पेय) दिया। तत्पश्चात, व्रतधारी अतिथि-सेवक महर्षि मुद्गल ने उन्मत्त वेशधारी भूखे तपस्वी दुर्वासा को बड़ी भक्ति से भोजन कराया। वह भोजन अत्यंत स्वादिष्ट था। उन्मत्त ऋषि पहले से ही भूखे थे, अतः उन्होंने परोसा गया सारा भोजन खा लिया। फिर महर्षि मुद्गल ने उन्हें और भोजन दिया॥14-16॥ | mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वागतं तेऽस्त्विति मुनिं मुद्गल: प्रत्यभाषत।
पाद्यमाचमनीयं च प्रतिपाद्यार्घ्यमुत्तमम्॥ १४॥
प्रादात् स तापसायान्नं क्षुधितायातिथिव्रती।
उन्मत्ताय परां श्रद्धामास्थाय स धृतव्रत:॥ १५॥
ततस्तदन्नं रसवत् स एव क्षुधयान्वित:।
बुभुजे कृत्स्नमुन्मत्त: प्रादात् तस्मै च मुद्गल:॥ १६॥
अनुवाद
मुद्गल ने उनसे कहा, "महर्षि! आपका स्वागत है।" ऐसा कहकर उन्होंने उन्हें पाद्य (जल), उत्तम अर्घ्य (जल) और आचमनीय (पेय) दिया। तत्पश्चात, व्रतधारी अतिथि-सेवक महर्षि मुद्गल ने उन्मत्त वेशधारी भूखे तपस्वी दुर्वासा को बड़ी भक्ति से भोजन कराया। वह भोजन अत्यंत स्वादिष्ट था। उन्मत्त ऋषि पहले से ही भूखे थे, अतः उन्होंने परोसा गया सारा भोजन खा लिया। फिर महर्षि मुद्गल ने उन्हें और भोजन दिया॥14-16॥
Mudgal said to him, "Maharshi! You are welcome." Saying so, he offered him padya (water), excellent arghya (water) and achmaniya (a drink). Thereafter, the fasting guest-servant Maharishi Mudgal offered food with great devotion to the hungry ascetic Durvasa dressed as a madman. That food was very tasty. The mad sage was already hungry, so he ate all the food served. Then Maharishi Mudgal gave him more food.॥14-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥