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mahabharat 3.260.11: राजन! एक दिन दिगम्बर वेश में भ्रमण कर रहे महर्षि दुर्वासा ने उत्तम व्रतों का पालन करने वाले पुण्यात्मा महात्मा मुद्गल का नाम सुना और उनके व्रत की कीर्ति सुनकर वे वहाँ पहुँचे॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.260.11 
तं तु शुश्राव धर्मिष्ठं मुद्‍गलं संशितव्रतम्।
दुर्वासा नृप दिग्वासास्तमथाभ्याजगाम ह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजन! एक दिन दिगम्बर वेश में भ्रमण कर रहे महर्षि दुर्वासा ने उत्तम व्रतों का पालन करने वाले पुण्यात्मा महात्मा मुद्गल का नाम सुना और उनके व्रत की कीर्ति सुनकर वे वहाँ पहुँचे॥11॥
 
Rajan! One day, Maharishi Durvasa, who was traveling in Digambara garb, heard the name of the virtuous Mahatma Mudgal who observed the best fasts. Hearing the fame of his fast, they reached there. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)