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mahabharat 3.26.17: जैसे प्रचण्ड अग्नि वायु की सहायता से सूखे वन को जला डालती है, वैसे ही राजा ब्राह्मण की सहायता से अपने शत्रुओं को भस्म कर देता है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.26.17 
यथा हि सुमहानग्नि: कक्षं दहति सानिल:।
तथा दहति राजन्यो ब्राह्मणेन समं रिपुम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रचण्ड अग्नि वायु की सहायता से सूखे वन को जला डालती है, वैसे ही राजा ब्राह्मण की सहायता से अपने शत्रुओं को भस्म कर देता है॥17॥
 
‘Just as a raging fire, with the help of the wind, burns up a dry forest, so a king reduces his enemies to ashes with the help of a Brahmin.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)