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mahabharat 3.26.11: ‘पिताजी! जो राजा इस लोक और परलोक को जीतने की इच्छा रखता है, उसे ब्राह्मण को साथ लिए बिना अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। जो राजा धर्म और अर्थ की शिक्षा प्राप्त कर चुका है और आसक्ति से मुक्त हो चुका है, वह अपने शत्रुओं का नाश कर देता है॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.26.11 
नाब्राह्मणस्तात चिरं बुभूषे-
दिच्छन्निमं लोकममुं च जेतुम्।
विनीतधर्मार्थमपेतमोहं
लब्ध्वा द्विजं नुदति नृप: सपत्नान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! जो राजा इस लोक और परलोक को जीतने की इच्छा रखता है, उसे ब्राह्मण को साथ लिए बिना अधिक समय तक नहीं रहना चाहिए। जो राजा धर्म और अर्थ की शिक्षा प्राप्त कर चुका है और आसक्ति से मुक्त हो चुका है, वह अपने शत्रुओं का नाश कर देता है॥ 11॥
 
‘Father! A king who desires to conquer this world and the other world should not stay for long without taking a Brahmin with him. A king who has received education in Dharma and Artha and who has got rid of attachment, destroys his enemies.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)