Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.259.28: व्यास बोले, "हे प्रिये! इस पृथ्वी पर दान से अधिक कठिन कोई कार्य नहीं है। लोग धन के लिए बड़े लोभी हैं और धन प्राप्त करना भी बहुत कठिन है।" 28. | mahabharat अध्याय 3.259: युधिष्ठिरकी चिन्ता, व्यासजीका पाण्डवोंके पास आगमन और दानकी महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
दानान्न दुष्करं तात पृथिव्यामस्ति किंचन।
अर्थे च महती तृष्णा स च दु:खेन लभ्यते॥ २८॥
अनुवाद
व्यास बोले, "हे प्रिये! इस पृथ्वी पर दान से अधिक कठिन कोई कार्य नहीं है। लोग धन के लिए बड़े लोभी हैं और धन प्राप्त करना भी बहुत कठिन है।" 28.
Vyasa said, "My dear! There is no more difficult task on this earth than charity. People are very greedy for wealth and it is very difficult to get wealth too." 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥