Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.258.12: मेरे विचार से वे पशु ठीक ही कह रहे हैं। हमें वन में रहने वाले जंगली पशुओं पर भी दया करनी चाहिए। इस द्वैत वन में रहते हुए हमें एक वर्ष आठ महीने हो गए हैं।॥12॥ | mahabharat अध्याय 3.258: पाण्डवोंका काम्यकवनमें गमन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते सत्यमाहु: कर्तव्या दयास्माभिर्वनौकसाम्।
साष्टमासं हि नो वर्षं यदेतदुपयुङ्क्ष्महे॥ १२॥
अनुवाद
मेरे विचार से वे पशु ठीक ही कह रहे हैं। हमें वन में रहने वाले जंगली पशुओं पर भी दया करनी चाहिए। इस द्वैत वन में रहते हुए हमें एक वर्ष आठ महीने हो गए हैं।॥12॥
‘In my opinion, those animals are right. We should also show mercy to the wild animals living in the forest. It has been one year and eight months since we have been living in this Dwait forest.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥