श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.257.9 
निषसादासने मुख्ये भ्रातृभि: परिवारित:।
तमुत्थाय महाराजं सूतपुत्रोऽब्रवीद् वच:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद वे अपने समस्त भाइयों से घिरे हुए अपने मुख्य सिंहासन पर बैठ गए। उस समय सारथिपुत्र कर्ण ने खड़े होकर महाराज दुर्योधन से यह कहा-॥9॥
 
After this, surrounded by all his brothers, he sat on his main throne. At that time, charioteer's son Karna stood up and said this to Maharaja Duryodhana -॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)