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mahabharat 3.257.6-7h: हे भरतश्रेष्ठ! अपने मित्रों के ये सुन्दर वचन सुनकर राजा दुर्योधन प्रसन्नतापूर्वक नगर में प्रवेश करके अपने राजभवन में चला गया। 6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  3.257.6-7h 
एता वाच: शुभा: शृण्वन् सुहृदां भरतर्षभ॥ ६॥
प्रविवेश पुरं हृष्ट: स्ववेश्म च नराधिप:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! अपने मित्रों के ये सुन्दर वचन सुनकर राजा दुर्योधन प्रसन्नतापूर्वक नगर में प्रवेश करके अपने राजभवन में चला गया। 6 1/2॥
 
Bharatshrestha! Hearing these beautiful words of his friends, King Duryodhana happily entered the city and went to his royal palace. 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)