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mahabharat 3.257.4: कुछ अन्य लोग पेट फूलने से पीड़ित होकर राजा दुर्योधन से कहने लगे, ‘यह यज्ञ युधिष्ठिर द्वारा किये गये यज्ञ के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं है।’ ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.257.4 
नैव तस्य क्रतोरेष कलामर्हति षोडशीम्।
एवं तत्राब्रुवन् केचिद् वातिकास्तं जनेश्वरम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुछ अन्य लोग पेट फूलने से पीड़ित होकर राजा दुर्योधन से कहने लगे, ‘यह यज्ञ युधिष्ठिर द्वारा किये गये यज्ञ के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं है।’ ॥4॥
 
Some other people suffering from flatulence started saying to King Duryodhana, 'This sacrifice is not even equal to one sixteenth of the sacrifice performed by Yudhishthira.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)