श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 25-d1h
 
 
श्लोक  3.257.25-d1h 
धार्तराष्ट्रोऽपि नृपति: प्रशशास वसुन्धराम्॥ २५॥
भ्रातृभि: सहितो वीरैर्भीष्मद्रोणकृपैस्तथा।
सङ्गम्य सूतपुत्रेण कर्णेनाहवशोभिना॥ २६॥
(सततं प्रीयमाणो वै देविना सौबलेन च।)
 
 
अनुवाद
यहाँ राजा दुर्योधन अपने वीर भाइयों भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, युद्ध में निपुण सारथी पुत्र कर्ण तथा द्यूतक्रीड़ा में कुशल शकुनि के साथ रहकर शाश्वत सुख का अनुभव करते हुए इस पृथ्वी पर शासन करने लगा।
 
Here King Duryodhana, staying with his brave brothers Bhishma, Drona, Kripacharya, charioteer's son Karna who excelled in war and Shakuni who was skilled in gambling, started ruling this earth feeling eternal happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)