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mahabharat 3.257.22: महाराज! फिर उन्हें अपने गुप्तचरों द्वारा यह समाचार भी मिला कि सारथिपुत्र कर्ण ने अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा दोहराई है।   |   mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.257.22 
भूयश्च चारै राजेन्द्र प्रवृत्तिरुपपादिता।
प्रतिज्ञा सूतपुत्रस्य विजयस्य वधं प्रति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! फिर उन्हें अपने गुप्तचरों द्वारा यह समाचार भी मिला कि सारथिपुत्र कर्ण ने अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा दोहराई है।
 
Maharaj! Then he also received the news through his spies that the vow of charioteer's son Karna to kill Arjun was repeated. 22.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)