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mahabharat 3.257.18: जब कर्ण ने युद्ध में अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा की, तब महान धनुर्धर और महारथी धृतराष्ट्र के पुत्रों ने बड़े जोर से जयजयकार किया ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.257.18 
अथोत्क्रुष्टं महेष्वासैर्धार्तराष्ट्रैर्महारथै:।
प्रतिज्ञाते फाल्गुनस्य वधे कर्णेन संयुगे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब कर्ण ने युद्ध में अर्जुन को मारने की प्रतिज्ञा की, तब महान धनुर्धर और महारथी धृतराष्ट्र के पुत्रों ने बड़े जोर से जयजयकार किया ॥18॥
 
When Karna promised to kill Arjuna in battle, the sons of Dhritrashtra, the great archer and master warrior, shouted loudly. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)