Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.257.16-17: उस समय कर्ण ने दुर्योधन से कहा - 'हे राजनश्रेष्ठ! मेरी यह प्रतिज्ञा सुनो - 'जब तक अर्जुन मेरे हाथों से मारा न जाए, तब तक मैं दूसरों से अपने पैर नहीं धुलवाऊँगा, केवल जल से बना हुआ भोजन नहीं करूँगा और असुरव्रत (क्रूरता आदि) का पालन नहीं करूँगा। जब कोई माँगेगा, तब मैं 'मेरे पास कुछ नहीं है' यह नहीं कहूँगा।'॥ 16-17॥ | mahabharat अध्याय 3.257: दुर्योधनके यज्ञके विषयमें लोगोंका मत, कर्णद्वारा अर्जुनके वधकी प्रतिज्ञा,युधिष्ठिरकी चिन्ता तथा दुर्योधनकी शासननीति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमब्रवीत् तदा कर्ण: शृणु मे राजकुञ्जर।
पादौ न धावये तावद् यावन्न निहतोऽर्जुन:॥ १६॥
कीलालजं न खादेयं करिष्ये चासुरव्रतम्।
नास्तीति नैव वक्ष्यामि याचितो येन केनचित्॥ १७॥
अनुवाद
उस समय कर्ण ने दुर्योधन से कहा - 'हे राजनश्रेष्ठ! मेरी यह प्रतिज्ञा सुनो - 'जब तक अर्जुन मेरे हाथों से मारा न जाए, तब तक मैं दूसरों से अपने पैर नहीं धुलवाऊँगा, केवल जल से बना हुआ भोजन नहीं करूँगा और असुरव्रत (क्रूरता आदि) का पालन नहीं करूँगा। जब कोई माँगेगा, तब मैं 'मेरे पास कुछ नहीं है' यह नहीं कहूँगा।'॥ 16-17॥
At that time Karna said to Duryodhan - 'O best of kings! Listen to this vow of mine - 'Until Arjuna is killed by my hands, I will not let others wash my feet, will not eat only food made from water and will not follow the Asurvrat (cruelty etc.). I will not say 'I don't have anything' when someone asks for it.'॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥