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mahabharat 3.256.9-10: वह दूत सब पाण्डवों के पास गया और उन्हें नमस्कार करके बोला, 'महाराज! कुरुवंश में श्रेष्ठ, राजाओं का राजा दुर्योधन अपने पराक्रम से अपार धन अर्जित करके यज्ञ कर रहा है। उसमें (विभिन्न स्थानों से) बहुत से राजा और ब्राह्मण आ रहे हैं।॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 3.256: दुर्योधनके यज्ञका आरम्भ एवं समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 256: दुर्योधनके यज्ञका आरम्भ एवं समाप्ति  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.256.9-10 
स गत्वा पाण्डवान् सर्वानुवाचाभिप्रणम्य च।
दुर्योधनो महाराज यजते नृपसत्तम:॥ ९॥
स्ववीर्यार्जितमर्थौघमवाप्य कुरुसत्तम:।
तत्र गच्छन्ति राजानो ब्राह्मणाश्च ततस्तत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह दूत सब पाण्डवों के पास गया और उन्हें नमस्कार करके बोला, 'महाराज! कुरुवंश में श्रेष्ठ, राजाओं का राजा दुर्योधन अपने पराक्रम से अपार धन अर्जित करके यज्ञ कर रहा है। उसमें (विभिन्न स्थानों से) बहुत से राजा और ब्राह्मण आ रहे हैं।॥9-10॥
 
That messenger went to all the Pandavas and greeted them and said, 'Maharaj! The best of the Kuru clan, the king of all kings, Duryodhana, is performing a yajna after acquiring immense wealth by his prowess. Many kings and Brahmins (from various places) are coming to it.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)