श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 256: दुर्योधनके यज्ञका आरम्भ एवं समाप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.256.5 
प्रहृष्टो धृतराष्ट्रश्च विदुरश्च महायशा:।
भीष्मो द्रोण: कृप: कर्णो गान्धारी च यशस्विनी॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस यज्ञ से धृतराष्ट्र, प्रसिद्ध विदुर, भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण और प्रसिद्ध गांधारी बहुत प्रसन्न हुए। 5॥
 
Dhritarashtra, the famous Vidur, Bhishma, Drona, Kripacharya, Karna and the famous Gandhari were very happy with this yagya. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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