| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 255: कर्ण और पुरोहितकी सलाहसे दुर्योधनकी वैष्णवयज्ञके लिये तैयारी » श्लोक d2h-22 |
|
| | | | श्लोक 3.255.d2h-22  | (तस्मादेष महाबाहो तव यज्ञ: प्रवर्तताम्।)
एवमुक्तस्तु तैर्विप्रैर्धार्तराष्ट्रो महीपति:।
कर्णं च सौबलं चैव भ्रातॄंश्चैवेदमब्रवीत्॥ २२॥ | | | | | | अनुवाद | | अतः हे महाबाहो! तुम्हारा यह यज्ञ अवश्य आरम्भ होना चाहिए। ब्राह्मणों की यह बात सुनकर राजा दुर्योधन कर्ण, शकुनि और उसके भाइयों से इस प्रकार बोला -॥ 22॥ | | | | "Therefore, O mighty-armed one! This sacrifice of yours must begin." Upon hearing these Brahmins say this, King Duryodhana spoke to Karna, Shakuni and his brothers thus -॥ 22॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|