श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 255: कर्ण और पुरोहितकी सलाहसे दुर्योधनकी वैष्णवयज्ञके लिये तैयारी  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  3.255.7-8 
एवमुक्तस्तत: कर्णो राजानमिदमब्रवीत्।
तवाद्य पृथिवीपाला वश्या: सर्वे नृपोत्तम॥ ७॥
आहूयन्तां द्विजवरा: सम्भाराश्च यथाविधि।
सम्भ्रियन्तां कुरुश्रेष्ठ यज्ञोपकरणानि च॥ ८॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के ये वचन सुनकर कर्ण ने उससे कहा- 'हे राजनश्रेष्ठ! इस समय राजा आपके अधीन है। हे कुरुवंशी! श्रेष्ठ ब्राह्मणों को बुलाकर विधिपूर्वक यज्ञ की सामग्री और उपकरणों की व्यवस्था करो।'
 
Hearing these words of Duryodhan, Karna said to him- 'O best of kings! At this time the king is under your control. O best of the Kuru clan! Call the best Brahmins and arrange the materials and equipments for the yagya as per the rituals. 7-8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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