| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 255: कर्ण और पुरोहितकी सलाहसे दुर्योधनकी वैष्णवयज्ञके लिये तैयारी » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 3.255.23  | रोचते मे वच: कृत्स्नं ब्राह्मणानां न संशय:।
रोचते यदि युष्माकं तस्मात् प्रब्रूत मा चिरम्॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘मित्रो! इन ब्राह्मणों की सारी बातें मुझे रुचिकर लगती हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। यदि तुम्हें भी ये अच्छी लगें, तो शीघ्र ही अपना मत प्रकट करो।’॥23॥ | | | | ‘Friends! I find all the words of these Brahmins interesting, there is no doubt about it. If you also like this, then express your opinion quickly.’॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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