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श्लोक 3.255.2  |
कर्ण उवाच
दुर्योधन निबोधेदं यत् त्वां वक्ष्यामि कौरव।
श्रुत्वा वाचं तथा सर्वं कर्तुमर्हस्यरिंदम॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| कर्ण ने कहा- कुरुपुत्र दुर्योधन! मेरी बात सुनो। शत्रुओं का नाश करने वाले! मेरी बात सुनो और उसके अनुसार सब कुछ करो॥ 2॥ |
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| Karna said- Son of Kuru Duryodhan! Listen to what I say. Destroyer of enemies! Listen to me and do everything accordingly.॥ 2॥ |
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