श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 255: कर्ण और पुरोहितकी सलाहसे दुर्योधनकी वैष्णवयज्ञके लिये तैयारी  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  3.255.19-20 
एष ते वैष्णवो नाम यज्ञ: सत्पुरुषोचित:॥ १९॥
एतेन नेष्टवान् कश्चिदृते विष्णुं पुरातनम्।
राजसूयं क्रतुश्रेष्ठं स्पर्धत्येष महाक्रतु:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैंने तुम्हें वैष्णव नामक इस यज्ञ के विषय में बताया है, जिसका अनुष्ठान पुण्यात्मा पुरुषों के लिए सर्वथा उपयुक्त है। आज तक आदिपुरुष भगवान विष्णु के अतिरिक्त किसी ने भी इस यज्ञ को नहीं किया है। यह महान यज्ञ राजसूय यज्ञ से भी श्रेष्ठ है।
 
I have told you about this yajna called Vaishnava, whose performance is absolutely appropriate for virtuous people. No one except the ancient man Lord Vishnu has performed this yajna till date. This great yajna is going to rival the best yajna performed by Rajasuya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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